

नदी भी खुश है, पीपल वाला चौपाल भी
- स्वाति तिवारी
आजकल माँ नर्मदा बहुत खुश है । हाँ, लोगों ने बताया इसका निर्मल पारदर्शी पानी अपने भविष्य को लेकर अब निश्ंिचत लग रहा है । कल -कल बहती हुई माँ नर्मदा अपने दोनों किनारों पर आने वाली तीन-तीन पीढी की दादी,नानी,माँ,सासू माँ, बहन-बेटी,बहुओं से कहते सुनी जा रही हैै कि प्रदेश के मुखिया ने सबसे पहले मेरे द्वार पर दस्तक दी .........बताओ अब तक पहले आया कोई ऐसा मुख्यमंत्री ?
सुनने वाली नानी-दादी, बहू-बेटियाँ सब वाह करते हुए आश्चर्य से देखती हैं नर्मदा के खिलखिलाते प्रवाह को ..............''अच्छा । ''
हाँ । मैं आज धन्य हूँ । ऐसा तो कोई सुयोग्य, समझदार और कर्मठ बेटा ही कर सकता है । किनारे-किनारे आने वाली भीड़ ने पूछा ऐसा क्या किया मुख्यमंत्री जी ने ?
अरे वाह । ऐसे बन रहे हैं सब जैसे जानते ही नहीं ? मुझे पता है वह तुम सबके द्वारे भी जा रहा है। मुझे यह भी पता है कि उसने लाड़ली लक्ष्मी,अन्नपूर्णा,सबकी चिन्ता की है । पिछले हफ्ते ही तो रामसिंह बताने आया था कि उसकी सयानी बिटिया का कन्यादान हो गया - सबके पीछे शिव है । पर मैं तो खुश हूँ वह सबसे पहले माँ की गोद में आया - आशीर्वाद लेने । और यही से लिया गया पहला संकल्प मुझे प्रदूषण से मुक्त करने का अपने लाव लश्कारे के साथ यहीं से निकला है प्रदेश को नया स्वरूप देने । विकास यात्रा पर, उसकी यह यात्रा सफल हो यही कामना है मेरी । माँ नर्मदा का निर्मल जल भी इन दिनों शिवराग की रव निकाल रहा है। निकाले भी क्यूं नहीं, नर्मदा का शिव से और शिव का नर्मदा से रिश्ता सब जानते हैं ।
यूँ तो नर्मदा का हर कंकर शंकर कहलाता है, पर शिवराज की बात ही और है । मध्यप्रदेश के चहुमुखी विकास के नारे को लेकर प्रदेश सरकार के साथ वे चले हैं । ताल-तलैया,घाट-किनारे, गाँव की गलियों में यह कहते हुए कि मैं कुछ देने नहीं, माँगने आया हूँ । देने को तो राजधानी में ऐलान करके भी देते ही हैं पर वहाँ बैठ कर आम आदमी से जुड़ाव तो नहीं हो सकता ना । जनमत नहीं बन सकता । इतिहास की तरह नर्मदा भी कई राजाओं-प्रजाओं की साक्षी है । वह कहती है कि मुखिया तो ऐसा ही होना चाहिए जो जनता के बीच जाए तो दूध में शक्कर की तरह घुल जाए । खेत में जाए तो हल चलाए, सड़क पर कचरा देखे तो बुहार लगाए,थका मजदूर पसीना पोछे तो उसके माथे रखी तगार को हाथ लगाए, स्कूल जाए तो मास्टरजी बन जाए, घर-घर जाए, गुड़ की डली खाए । भू-माफिआ दिखे तो बाहुबली सरकार में बदल जाए । उसके दिल में अपनी जनता के लिए प्यार है तो विकास में बाधक तत्वों के विनाश के लिए ताकत भी । जब तक मुखिया गाँव- गाँव नहीं घूमता तब तक नाम का मुखिया होता है, जनता से उसका सीधे रिश्ता होना संभव ही नहीं होता । पर सही मायने में नेता सफल वही होता रहा है जो अपनी आँखों से जनता का हाल देखे,उनके दुखदर्द सुने, समझे और समस्याओं के यथा संभव समाधान भी निकाले । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार और समाज को जोड़ने के अभियान के साथ पूरे देश में एक नयी छबि के साथ उभरे हैं । राज्य सरकार ने सात प्राथमिकताएँ क्रमशः खेती को लाभ का धंधा बनाना, निवेश में वृद्धि, अधोसंरचना विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण,सुशासन और सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था निर्धारित की है । इनकी पूर्ति के लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर कार्य किया जा रहा है ।
यह निःसन्देह पहली बार है कि इतने व्यापक स्तर पर इतने संगठित तरीके से कोई मुख्यमंत्री प्रदेश में जनमत के साथ नई इबारत लिख रहे है । इससे पहले शिवराज जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तब जनदर्शन यात्राएं की थी । इस बार अमरकंटक से शुरू करके अब तक वे डिडोंरी, अलीराजपुर,झाबुआ और बैतूल जिलों की यात्रा कर चुके हैंै । इन जिलों के दूरदराज के लगभग दुर्गम गाँवों में उन्होंने रात्रि विश्राम भी किया । अब तो गाँव का पीपल के नीचे बना चौपाल भी खुश है कि प्रदेश के सर्वेसर्वा वहाँ बैठ कर बतिया रहे हैं । कुछ कहते है, कुछ सुनते है । स्कूल में बच्चों को उनके रूप में एक योग गुरू के दर्शन भी हुए है । वे योग के माध्यम से प्रदेश के कर्णधारों को स्वस्थ्य बनाना चाहते हैं । ग्रामीण परिवेश को स्वच्छ बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री स्वयं झाडू हाथ में उठाकर गाँव की गलियों में सफाई करते हुए लोगों से पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प ले रहे हैं । आँगनवाडी में बटने वाले आहार का जायजा ले रहे हैं ।
अब हाथठेला वाला हो या सायकल रिक्शा चालक, हमारे घरों में काम करने वाली घरेलू नौकर हो चाहे पत्थर तोड़ती मजदूर सब अपनी बात अपने शिवभैया से कहने सुनने लगे है । गरीब और मजदूर हो चाहे किसान उनका दर्द अगर मुख्यमंत्री ध्यान से सुन रहे है तो दर्द का अहसास कुछ यूँ ही कम हो जाता है । लोग कहते है प्रदेश की बागडोर ऐसे नेता को मिली हैं जो प्रदेश के एक कोने से दूसरे कोने तक की दूरी कदमों से नाप रहा है । एक अलग पहचान है अब उनकी लोग उन्हें कहते है पाँव -पाँव वाला भैया । इस बार उनकी यात्रा जनजागरण के लिए चर्चित हो रही है । सच यह है कि मध्यप्रदेश अपना तभी बनेगा जब अपने प्रतिनिधि अपनों के बीच जायेंगे । तब नदियाँ गाएँगी गीत प्रवाह के खेत लहलहाएंगे सरसों,कपास,गेहू बाजरे के विभिन्न रंगों से, तब बच्चा माँ से जिद करेगा मुझे स्कूल जाना है । आज बडे सर कसरत सिखाएंगे, किसान की पत्नी उसके खाने की पोटली में चटनी,रोटी के साथ गुड़ की डली भी रखेगी क्या पता कब शिव भैया आकर सुदामा की पोटली खोल कर देख ले तो, क्या सोचेंगे वे ? आतिथ्य की मिठास मेजबान की उजास होती है - यही हमारी परम्परा है हमारा संस्कार - नर्मदा भैया ने तो पूरी शिवपुराण सुना दी तब किनारे पर खड़ी भीड़ ने कहा नर्मद हर और नर्मदा ने कहा आज तो सब बोलों जय मध्यप्रदेश - अपना प्रदेश ।
कितने आश्चर्य की बात है नदी अपने निर्धारित रास्ते पर बहती है । वह किसी के घर नहीं जाती पर उसे सब पता है ? प्रश्न उठता है कैसे ?
अरे भाई वह नहीं जाती तो क्या हुआ लोक दुख दर्द लेकर मान मिन्नत करने और खुशियों में नारियल,चुनरियाँ चढ़ाने नदी किनारे ही तो आते है वह घर घर की बात सुनती है वही साक्षी है जीवन प्रवाह की ।
स्वाति तिवारी
ईएन-1/9 चार इमली भोपाल
संपर्क 9424011334,9425056505 १८ /०२/१९१० को दैनिक जागरण में प्रकाशित
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